जोधपुर। बासनी स्थित मेडिपल्स हॉस्पिटल के हृदय रोग विभाग में टॉवी (बिना चीरे के हृदय के वॉल्व का प्रत्यारोपण) पद्धति से पहली बार 81 वर्षीय मरीज के हार्ट का वॉल्व बदला गया। हॉस्पिटल की कार्डियक सर्जन डॉ. रूचि वाटवानी ने बताया कि मरीज के हृदय और शरीर में रक्त पहुंचाने वाली मुख्य नाड़ी (एओर्टा) के मध्य स्थित एऑर्टिक वॉल्व में गंभीर सिकुडऩ (वालव्यूलर एऑर्टिक स्टेनोसिस) की तकलीफ थी जिसके चलते मरीज के हृदय पर बहुत दबाव था और मरीज की सांस फूलने लगती थी। ऐसे में मरीज को कभी भी हार्ट फेल्यर या गंभीर अनियमित धडक़न का खतरा था। सामान्यत इस बीमारी का इलाज चीरे वाले ऑपरेशन से सिकुड़े हुए वॉल्व को बदलना रहता है, जिसे सर्जिकल एऑर्टिक वॉल्व रिप्लेसमेंट कहते है। चूंकि मरीज 81 साल का वृद्ध था तथा उन्हें गंभीर फेफड़ों की बीमारी भी थी इस कारण मरीज सर्जरी के लिए हाई रिस्क अनफिट थे। ऐसे में एऑर्टिक वॉल्व का प्रत्यारोपण बिना चीरे, बिना बेहोशी एंजियोग्राफिक विधि से किया जाता है. जिसे ट्रांस कैथेटर एऑर्टिक वाल्व इंप्लांटेशन (टॉवी) कहा जाता है। प्रोसिजर के बाद 81 वर्षीय वृद्ध मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है, उन्हें उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। हॉस्पिटल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुमिता अग्रवाल ने बताया कि अब तक ये इलाज जोधपुर के किसी अन्य निजी हॉस्पिटल में उपलब्ध नहीं था। मेडिपल्स की ओर से पहली बार निजी क्षेत्र में अपने मरीजों को यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। हॉस्पिटल के निदेशक मयंक सिंघी ने पूरे हृदय रोग विभाग को बधाई दी है। इस ऑपरेशन में डॉ. रूचि वाटवानी, कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. मानिक चोपड़ा, डॉ. प्रवीण गर्ग, डॉ. सौरभ बंसल, एनेस्थेटिस्ट डॉ. नीरू गौड़ सहित नर्सिंग ऑफिसर और कैथ लैब टेक्नीशियन का विशेष योगदान रहा।



