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हाईकोर्ट ने लगाई प्रशिक्षु रेजिडेंट डॉक्टर के एपीओ आदेश पर रोक

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राज्य सरकार से जवाब मांगा, अगली सुनवाई 14 अगस्त को

मधुहीर राजस्थान

जोधपुर। नागौर के जेएलएन जि़ला अस्पताल में एक गर्भवती महिला की इलाज के दौरान मृत्यु हो जाने पर रात्रि ड्यूटी पर कार्यरत प्रशिक्षु रेजिडेंट चिकित्सक को एपीओ करने के आदेश पर राजस्थान हाईकोर्ट ने रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। भावनगर, गुजरात निवासी डॉ. कावद अंकित जेरामभाई की ओर से अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर बताया कि याचिकाकर्ता ने वर्ष 2021 में एमबीबीएस करने के बाद नीट पीजी प्रवेश परीक्षा 2023 में भाग लिया। इसमें उत्तीर्ण होने पर उसे अगस्त 2023 में नागौर के राजकीय मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत जेएलएन जि़ला अस्पताल आवंटित किया गया जिसमें उसने प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में डिप्लोमा स्नातकोत्तर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में 14 अगस्त 2023 को जॉइन किया। नियमानुसार मेडिकल स्नातक डिग्री हासिल करने के बाद दो वर्षीय पीजी स्नातकोत्तर डिप्लोमा में एडमिशन होने पर प्रशिक्षु रेजिडेंट डॉक्टर कहलाता है जो राजस्थान सेवा नियम 1951 के प्रावधानों के अनुसार गवर्नमेंट अधिकारी या राजकीय सेवक की परिभाषा में नहीं आता है। आरएसआर के नियम अनुसार एपीओ केवल राजकीय कर्मचारियों और अधिकारियों को ही किया जा सकता है जबकि याची दो वर्षीय पीजी स्नातकोत्तर डिप्लोमा का विद्यार्थी हैं जिसे कोई मासिक सैलरी नही मिलती हैं। गत 10 मई 2024 की रात्रि ड्यूटी पर होने के कारण अस्पताल के इंचार्ज द्वारा उसे केवल इस कारण एपीओ कर दिया गया कि इलाज के दौरान एक प्रसूता की मृत्यु हो गई थी। वस्तुत: रात्रिकालीन ड्यूटी पर सीएमओ या केजुयल्टी मेडिकल ऑफिसर और अन्य चिकित्सक मौजूद रहते हैं जिनके दिशा-निर्देशों के अनुसार ही एक शिक्षार्थी के रूप में रेजिडेंट डॉक्टर कार्य करता है। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि एपीओ करने से अबदो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स कैसे पूर्ण होगा क्योंकि निदेशालय में भेजने से याचिकाकर्ता के प्रशिक्षण हेतु स्वास्थ्य भवन में कोई मेडिकल कॉलेज अस्तित्व में नहीं है। ऐसे में जि़ला अस्पताल नागौर के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी का आदेश तुगलकी फऱमान जैसा हैं। एमसीआई के प्रावधानों अनुसार एक रेजिडेंट डॉक्टर एक साल में केवल 20 छुट्टियां ही ले सकता हैं। बिना कोई जांच किए और बिना सुनवाई का मौका दिए याचिकाकर्ता को जयपुर पदस्थापना की प्रतीक्षा में करना हास्यास्पद है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जस्टिस अरुण मोंगा ने दिनांक एपीओ आदेश पर रोक लगाते हुए याचिकाकर्ता को उसी आवंटित अस्पताल में रेजिडेंसी कोर्स पूर्ण करवाने के अंतरिम आदेश दिए औऱ राज्य सरकार सहित अन्य से जवाब तलब किया। मामले में अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी।

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