मधुहीर राजस्थान
जोधपुर। राजस्थान में मेडिकल शिक्षा पर इस समय गहन बहस छिड़ी हुई है। फैकल्टी की भारी कमी और छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहे असर को देखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने नये फैकल्टी पात्रता नियम (TEQ) जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य मेडिकल हेल्थ में कार्यरत योग्य चिकित्सकों को फैकल्टी में शामिल करना है, ताकि शिक्षा व्यवस्था को मजबूती दी जा सके।
हर ज़िले में कॉलेज, लेकिन फैकल्टी नहीं
प्रदेश में लगभग हर ज़िले में मेडिकल कॉलेज खुल चुके हैं, लेकिन गिने-चुने मेडिकल एजुकेशन टीचर्स ही उपलब्ध हैं। अधिकांश प्रोफेसर रिटायरमेंट के कगार पर हैं और नई भर्तियाँ वर्षों से नहीं हुईं। कई कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट खाली पड़ी हैं और ad-hoc शिक्षकों से काम चल रहा है। कई बार निरीक्षण पास कराने के लिए पास के कॉलेजों से अस्थायी रूप से टीचर्स बुलाने पड़ते हैं। परिणामस्वरूप छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कई नए कॉलेजों में छात्र ऑनलाइन वीडियो देखकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
अनुभवी डॉक्टर ही सबसे अच्छे शिक्षक
ARISDA का कहना है कि मेडिकल प्रैक्टिस में वर्षों का अनुभव रखने वाले चिकित्सक ही वास्तव में छात्रों के लिए सबसे उपयोगी साबित होंगे। एक ऐसा मेडिसिन डॉक्टर जिसने 200–250 बेड वाले अस्पताल में 10 साल काम किया है और हजारों मरीजों का इलाज किया है, वह न केवल मरीज का इलाज करना जानता है बल्कि उसे पढ़ा भी सकता है। प्रैक्टिकल अनुभव ही मेडिकल शिक्षा की सबसे बड़ी किताब है।
गुणवत्ता नहीं, निजी प्रैक्टिस पर असर
ARISDA ने RMCTA की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। असल में, कुछ पुराने शिक्षकों की निजी प्रैक्टिस प्रभावित होगी और उन्हें आर्थिक नुकसान होगा, इसलिए विरोध किया जा रहा है।
कोचिंग संस्थानों से उदाहरण
ARISDA ने तर्क दिया कि जैसे कोचिंग संस्थानों में बिना प्रोफेसर टाइटल के शिक्षक छात्रों को IAS, NEET और JEE जैसी कठिन परीक्षाओं में सफल बनाते हैं, वैसे ही अनुभवी डॉक्टर भी छात्रों को बेहतर शिक्षा दे सकते हैं।
AIIMS मॉडल को बताया सही रास्ता
ARISDA ने AIIMS जैसे संस्थानों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ शिक्षा की गुणवत्ता उच्च स्तर की है क्योंकि डॉक्टरों को NPA (Non-Practicing Allowance) मिलता है और वे निजी प्रैक्टिस नहीं करते। यदि RMCTA को वास्तव में शिक्षा की चिंता है तो उन्हें NPA को अनिवार्य बनाने की मांग करनी चाहिए, न कि नये पात्रता नियमों का विरोध।
अपनी ही काबिलियत पर कैसा सवाल?
ARISDA ने कहा कि मेडिकल हेल्थ में कार्यरत डॉक्टरों को पढ़ाने वाले, गाइड करने वाले और पीजी में क्लास लेना सिखाने वाले यही मेडिकल कॉलेज के शिक्षक रहे हैं।
आज उन्हीं साथियों के खिलाफ आपत्ति जताना मतलब अपनी ही काबिलियत पर सवाल उठाना है।
अगर ये डॉक्टर काबिल नहीं हैं, तो यह दोष स्वयं उस शिक्षा प्रणाली का है जिसे सरकार को सुधारना चाहिए।
असल में, मेडिकल कॉलेज टीचर्स को साथी चिकित्सकों का दिल से स्वागत करना चाहिए और सहयोग की भावना से आगे बढ़ना चाहिए।
ARISDA पदाधिकारियों के बयान
ARISDA अध्यक्ष डॉ. रामनिवास सेंवर ने कहा, “गुणवत्ता का तर्क केवल एक बहाना है। असली सवाल छात्रों के भविष्य का है। अनुभव और ज्ञान से लैस डॉक्टर ही सबसे अच्छे शिक्षक हो सकते हैं। आज आरएमसीटीए हड़ताल पर लेकिन पीछे ग्रुप 2 डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था संभाल रखी है । ”
ARISDA महासचिव डॉ. भवानी सिंह विश्नोई:- “नये पात्रता नियमों से मेडिकल शिक्षा को नई दिशा मिलेगी। RMCTA को टकराव की बजाय समाधान की ओर बढ़ना चाहिए। यह सुधार छात्रों और मेडिकल कॉलेज दोनों के लिए ज़रूरी है।”
ARISDA ने स्पष्ट किया कि NMC के नये फैकल्टी पात्रता नियम मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को और मजबूत करने का अवसर हैं। यह कदम न केवल छात्रों के भविष्य के लिए आवश्यक है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा की मजबूती और समाज की बेहतर सेवा के लिए भी अहम है।



