जोधपुर में आई एम ए शाखा के द्वारा मांगों को लेकर जानकारी दी।
मधुहीर राजस्थान
जोधपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन राज्य ब्रांच की कार्य समिति की बैठक रविवार को जोधपुर में आईएमए शाखा के तत्वावधान आयोजित की गई। राजस्थान के डॉक्टर की सबसे बड़ी एवं शीर्ष संस्था द्वारा राज्य सरकार से सरकारी डॉक्टर एवं प्राइवेट डॉक्टर्स की लंबित समस्याओं के बारे में वर्षा गई एवं सरकार से मांग की गई।
एक सशक्त विकसित राष्ट्र एवं कुमाल समाज का आधार स्तंभ उसके शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ नागरिक होते हैं। अगर देश एवं प्रदेश का नागरिक शारीरिक, मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं होगा तो राष्ट्र की प्रगति प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बाधित होगी, इसी कहते हैं। पहला सुख निरोगी काया राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं में भागीदारी प्राइवेट हॉस्पिटल की आज भी 60 से 70% है। प्रदेश के निजी विकित्सालय पिछले चार-पांच साल से सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य बीमा योजना में सरकारी रेटों पर राजस्थान की गरीब जनता का इलाज कर रहे हैं लेकिन सरकार की तरफ से प्राइवेट अस्पताल की तकलीफ एवं समस्याओं का कोई हल नहीं निकाला जा रहा।
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य बीमा योजना :
इस योजना के तहत राजस्थान के निजी चिकित्सालय तकरीबन 1000 से ऊपर जुड़े हुए हैं जो की सरकारी दरों पर मरीजों को इलाज दे रहे हैं इसलिए प्रतिवर्ष प्रतिदिन इलाज की दरें राज्य सरकार द्वारा कम की जा रही है जबकि महंगाई बढ़ती जा रही है। जिससे राजस्थान प्रदेश के छोटे एवं मंझले निजी चिकित्सालय धीरे-धीरे बंद होने की कगार पर आ जाएंगे जिससे दूर दराज के इलाकों में पीड़ित मर्र को इलाज में तकलीफ आएगी।
इस मां योजना में सबसे बड़ा विवाद यह है कि बिना निजी चिकित्सालयों को विश्वास में लिए अपर मिडिल क्लास के लाख परिवारों को रुपए 850 ते स्वास्थ्य बीमा कर दिया गया जो की आयुष्मान की दरों पर ही उनके पैकेज तय कर दिए गए, यह सरासर निजी की चिकित्सालय पर आर्थिक भार सरव द्वारा डाला गया है जिसको तुरंत प्रभाव से वापस ले या इनकी अलग से केटेगरी बनाकर पैकेज रेट तय करे।
सरकार ने इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए निजी अस्पतालों को जिनकी सहभागिता 60 से 70% है उनके प्रतिनिधियों को इन योजना के नियम कायदे एवं बीमारियों की पैकेज दरों को तय करने में रखना चाहिए। डॉक्टर्स पर हिंसा एवं अस्पतालों में मारपीट की घटनाओं के लिए सरकार द्वारा SOP जारी की हुई है जिसको एक्ट में बदलकर सख्त कानून बन जाए। क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट (CEA) के तहत 50 बेड से कम निजी चिकित्सालय को इस एक्ट से मुक्त रखा जाए, जिससे प्रदेश में निजी स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू एवं सुलभ मरीजों को मिलती रहे। राजस्थान के छोटे नर्सिंग होम एवं अस्पतालों का भवन नियमन संस्थागत श्रेणी में किया जाए राजस्थान में चिकित्सा सेवाओं में निजी चिकित्सार का बड़ा योगदान है एवं आम जनता की स्वास्थ्य देखभाल का दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ज्यादातर अस्पताल आवासीय क्षेत्र में रहे हैं, राज्य सरकार से मांग है कि सभी को संस्थागत श्रेणी में नियमित करें। मेडिकल स्टूडेंट एवं रेजिडेंट डॉक्टर के अच्छे आवास रहन-सहन एवं कार्य दिवस तय करें, मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सुरक्षित एवं भय मुक्त वातावरण की व्यवस्था करें। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की समस्याओं को दूर करें एवं बहुत समय से लंबित इंडियन मेडिकल सर्विसेज केडर चालू करने की कृपा करें।
बायोमेडिकल वेस्ट बारकोड:
प्रदेश में सभी अस्पतालों ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पंजीकरण करा रखा है एवं बाकी मेडिकल वेस्ट के निजी एजेंसी को बायोमेडिकल वेस्ट के लिए सालाना फीस देते हैं लेकिन बारकोड के नाम से अनावश्यक भारी राशि निजी चिकित्सालय से मांगी जारी है जिसको तुरंत रोका जाए एवं उचित समाधान निकले।



