मधुहीर राजस्थान
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसियेशन के तत्वावधान में आज राजस्थान उच्च न्यायालय के एकीकरण की मांग को लेकर जोधपुर के अधिवक्ताओं ने अंतिम कार्यदिवस पर स्वैच्छिक रूप से हड़ताल रखी एवं न्यायिक कार्यो में उपस्थिति नहीं दी। एकीकृत उच्च न्यायालय की मांग को लेकर आज अधिवक्ताओं द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय परिसर, झालामंड एवं हैरीटेज उच्च न्यायालय परिसर, पावटा दोनों स्थानों पर धरना भी आयोजित किया।
अध्यक्ष रतनाराम ठोलिया ने बताया कि आज अंतिम कार्य दिवस पर अधिवक्ताओं द्वारा न्यायिक कार्यों का स्वैच्छिक बहिष्कार किया गया। अधिवक्ताओं ने उच्च न्यायालय परिसर झालामंड एवं हेरिटेज उच्च न्यायालय परिसर में सम्मिलित होकर एकजुटता में शांतिपूर्ण धरना आयोजित किया। इस बहिष्कार के दौरान अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों एवं समस्याओं को लेकर अपनी आवाज बुलंद की एवं कहा कि अधिवक्ताओं हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है एवं एकीकृत उच्च न्यायालय की मांग लम्बे समय से लंबित है। इस संदर्भ में न्यायपालिका एवं प्रशासन से शीघ्र समाधान की अपेक्षा जताई। धरना स्थल पर अधिवक्ताओं ने शांतिपूर्वक अपने विचार रखे और अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। अंत में सभी अधिवर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि एकीकृत उच्च न्यायालय की जायज मांग पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे भविष्य में और कठोर कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।
महासचिव षिवलाल बरवड़ ने बताया कि एकीकृत उच्च न्यायालय की मांग को लेकर आज प्रातः 10.00 बजे से ही अधिवक्तागण उच्च न्यायालय परिसर, झालामंड एवं हैरिटेज उच्च न्यायालय परिसर दोनो स्थानों पर धरने पर बैठे। आज सभी अधिवक्ताओं ने न्यायिका कार्यों में स्वैच्छा से भाग नहीं लिया एवं एकीकृत उच्च न्यायालय की मांग को दोहराया। धरने पर एसोसियेषन के अध्यक्ष रतनाराम ठोलिया, उपाध्यक्ष धीरेन्द्र दाधीच, महासचिव षिवलाल बरवड़, सहसचिव विजेन्द्र पुरी, पुस्तकालय सचिव कांता राजपुरोहित, कोशाध्यक्ष विमल कुमार माहेष्वरी, राजेष सोनी, सुरेष चौहान, शारदा, एस.एस. गहलोत, नरेन्द्र गोयल, लक्ष्मी यादव, मोहन जाखड़, पुखराज गौदारा, तपेष सैन, रामसिंह, षिवानी वैष्णव, पुजा राठौड़ रामलाल चौद्यरी (सिरवी), गणपतसिंह राठौड, भीमराज मुडिया, ओम प्रकाष चाहर, चेतन प्रकाष मरवण, सुरेष पारिक, रामसिंह नरूका सहित सैंकडों अधिवक्तागण धरने पर बैठैं एवं किसी भी अधिवक्ता ने राजस्थान उच्च न्यायालय व अधिनस्थ न्यायालयों के न्यायिक कार्यों में अपनी उपस्थिति नहीं दी।


