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गौचर हथियाने वाला नरक गामी होता है — बालयोगी संतोष महाराज

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देसुरी। निकटवर्ती गांव सांसरी में पांच दिवसीय गुरुड़ पुरान कथा के दौरान कथाकार एवं संत बालयोगी संतोष महाराज ने वृषोत्सर्ग कर्म का व्याख्यान करते हुए बताया कि माता- पिता की सेवा नहीं करने वाला, जीवों की हत्या कर मांस- मद्य का सेवन करने और गौचर भूमि पर अतिक्रमण करने वाला नरक गामी होता है। कानून के तहत 3 -7 साल तक जेल में भी रहना होगा। वर्तमान में गायों और सांडों की स्थिति ठीक नहीं है। कुछ लोग बछड़ों एवं सांडों का उत्पीडन कर रहे है। हमें गायों के सम्मान की और लौटना होगा। शास्त्र और संविधान हमारे आदर्श जीवन जीने के मार्गदर्शक हैं हमें समय समय पर इनका अध्ययन करना चाहिए। जो शास्त्र और संविधान सम्मत जीवन जीता है वो जीते जी मुक्त है उनको न तो इस जीवन में जेल आदि का नारकीय जीवन जीना पड़ेगा और न ही मरने के बाद।
इस अवसर पर बालयोगी ने दाह संस्कार, पिंड दान,अष्टदान, गौदान,घटदान, उत्तम और मध्यमा षौडसी, नारायण बलि और वृषोत्सर्ग के महत्व को बताते हुए कहा कि पितृदोष निवारण हेतु यथा शक्ति गायों की सेवा एवं गौ दान करना चाहिए। उचित जगह पर प्याऊ और अवाला बना कर और उत्तम क्वालिटी का सांड का गौशाला में उत्सर्ग (दान) करना चाहिए। इससे पितृदोष तो मिटेगा ही साथ में गायों के संरक्षण और संवर्धन में सहायता मिलेगी। 21 प्रकार के नरकों का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि गर्भपात कराने वाला और करने वाला, बलात्कार करने वाला, पुत्रियों को बेचने वाला, बहिनों पर उत्पीड़न करने वाला,झूठी गवाही देने वाला, दोस्त या पार्टनर के साथ धोखा करने वाला, गरीब का धन हरने वाला, बुजुर्गों का अपमान करने वाला,गाय गुरु और निर्बल की हत्या करने वाला इस जीवन में भारतीय दंड संहिता के तहत जेल में सड़ता रहता है और मरने के बाद विभिन्न नरकों का दंड भोगता है जबकि संयमित जीवन जीने वाला,आचार विचारों में शुद्धता रखने वाला, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य,शम, संतोष का पालन करने वाला, न तो इस जीवन में दुःख भोगता है और न ही मृत्यु के बाद किसी के लिए दुख का कारण बनता है। इस अवसर पर महाराज ने कहा कि प्रेत योनि की शुद्धि के लिए हर व्यक्ति को गरुड़ पुराण का पाठ करना और कराना चाहिए।
कथा पूर्णाहुति पर रामलाल सुपुत्र भाणाराम वरफा, ओमप्रकाश, दुर्गाराम सीरवी, डूंगाराम सीरवी, पोकरराम सीरवी, मोहनलाल, मोटाराम भगाराम सीरवी, जगदीश कुमार, मांगीलाल, सुरेशकुमार, राकेश कुमार, रमेश कुमार एवं मगाराम ने संतों का स्वागत सत्कार करते हुए उचित दान दक्षिणा देकर कथा समापन रस्म अदायगी की।

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