मधुहीर राजस्थान
जोधपुर। वास्तु प्रकृति द्वारा दिया हुआ अनमोल उपहार है जो की वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित होता है और विज्ञान में विकल्प का कोई विकल्प नहीं होता है ।वास्तु हमे प्रकृति से जोड़ता है मानव द्वारा निर्मित भवन मे पंच तत्वों का सही समायोजन ही वास्तु है जिस प्रकार से मानव शरीर की सरंचना पंच तत्वों से मिलकर हुई हैं ठीक उसी प्रकार भवन में पंच तत्वों को उनके उचित स्थान व सही दिशा मे स्थापित कर हम भवन से ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं इसके विपरित अगर कोई व्यक्ति विकल्प ढूंढता है या मन मर्जी से तत्वों को स्थापित करने की भूल करता है तो उस भवन मे रहने वाले हर व्यक्ति को रोग आर्थिक, शारीरिक, सामाजिक व मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है! ऐसा मानना है अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वास्तुविद एवं लेखक डॉ भूपेन्द्र वास्तुशास्त्री का ।निर्माणाधीन भवन में पंच तत्वों को लेकर बहुत बार व्यक्ति समझौता करने के लिए तैयार हो जाता है जो कि सैद्धांतिक नहीं होता है ।प्राकृतिक प्रकोप से बचने के लिए उचित वास्तु अपनाए साथ ही किसी प्रकार के विकल्प की तलाश नही करे ईशान में भूमिगत जल आग्नेय में अग्नि नेरीत्य में पृथ्वी वायव्य में वायु और ब्रह्म स्थान में आकाश तत्व को स्थापित कर जीवन को शांति पूर्ण तरीक़े से जिया जा सकता है ।


