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पति की हत्या के मामले में पत्नी और उसके प्रेमी को मिला संदेह का लाभ

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हाईकोर्ट ने किया बरी

मधुहीर राजस्थान
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 साल पुराने हत्या के मामले में पत्नी और उसके कथित प्रेमी को बरी कर दिया है। जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने प्रतापगढ़ फास्ट ट्रैक कोर्ट के 5 दिसंबर 2001 के फैसले को पलट दिया है। हाईकोर्ट ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में माना कि अभियोजन पक्ष सबूतों की श्रृंखला पूरी करने में विफल रहा और सबूत के आधार पर दोष सिद्ध करने के लिए आवश्यक मानदंडों को पूरा नहीं कर सका।
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सबूत की कड़ी हर स्तर पर टूटी हुई है। मात्र संदेह, अटकलों या बाद में सुधारे गए बयानों के आधार पर किसी को हत्या जैसे गंभीर अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। जब सबूत की श्रृंखला अधूरी, अस्पष्ट और विरोधाभासी हो तो न्याय का तकाजा यही है कि आरोपी को संदेह का लाभ देकर बरी किया जाए। इसी कारण हाईकोर्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के 5 दिसंबर 2001 के फैसले को पलटते हुए दोनों अपीलकर्ताओं को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
मामला चित्तौडग़ढ़ के गांव गाडोला (थाना रठांजना) का 3 मार्च 1998 का है। गांव गाडोला के रहने वाले अंबालाल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटनाक्रम में सामने आया कि 3 मार्च 1998 की रात लगभग 8-9 बजे धापू बाई ने बद्रीलाल को सूचित किया कि अंबालाल की तबीयत खराब है। बद्रीलाल ने अंबालाल को बाइक पर प्रतापगढ़ हॉस्पिटल ले जाने की कोशिश की लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। उसी रात बद्रीलाल ने पुलिस स्टेशन रठांजना में रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें अचानक और असामयिक मृत्यु की सूचना दी गई। बाद में बीस अप्रैल 1998 को बद्रीलाल ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतापगढ़ के सामने एक शिकायत दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि मृतक की पत्नी संपत बाई का सह आरोपी जगदीश के साथ अवैध संबंध था। शिकायत में कहा गया था कि जब अंबालाल ने जगदीश की उपस्थिति पर आपत्ति जताई, तो दोनों आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद संपत बाई ने उसे चाय परोसी, जिसे पीने के बाद अंबालाल ने खट्टे स्वाद की शिकायत की और बेचैनी महसूस करने लगा। आरोप था कि उसने दूसरों को बताया कि उसकी पत्नी और जगदीश के बीच अवैध संबंध है और उसे दी गई चाय में जहर मिलाया गया था। इस शिकायत पर साजिश रचकर हत्या की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच के बाद संपत बाई और जगदीश के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। फास्ट ट्रैक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रतापगढ़ ने 5 दिसंबर 2001 को संपत बाई और जगदीश को दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले के खिलाफ दोनों ने अपील दायर की।

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