ढोल-नगाड़े डीजे की धुन पर शिक्षक चोयल को दी विदाई
मधुहीर राजस्थान
जैसलमेर ( चुतराराम देवपाल )। जिले के विश्वास क्लासेज के शिक्षक जगदीश चोयल की विदाई समारोह में बच्चे व अभिभावक भावुक
हो उठे। हो भी क्यों न वह बच्चों को बड़े प्यार से पढ़ाते थे। अपना अधिकतर समय विद्यालय में व्यतीत करते थे । रविवार को भी कोचिंग
आते थे। उनमें एक उत्कृष्ट शिक्षक के सारे गुण थे।भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊपर माना गया है इसका जीता जागता
उदाहरण विश्वास क्लासेज मे देखने को मिला। यहां शिक्षक जगदीश चोयल की विदाई एक अनोखे अंदाज में की।
ढोल-नगाड़े डीजे की धुन पर नाच कर फूल मालाओं के साथ छात्र छात्राओं ने शिक्षक को विदाई दी इस दौरान अभिभावकों व छात्र-छात्राओं ने
अपने गुरु के पुरानी यादों को ताजा किया जगदीश चोयल के विश्वास क्लासेज के साथ 7 साल के सफर को याद किया तथा पुराने किसे तथा
गुरु के जुड़ी यादों को सीनियर विद्यार्थियो ने अपने जूनियर के साथ सांझा किया ।विदाई समारोह में लोगों की भीड़ कोचिंग परिसर से बाहर
मुख्य रोड को जाम किए हुए था।विदाई समारोह में जगदीश को शिक्षक राजेश ने साफा व विक्रम माला पहनाकर तथा ज्योती सुथार मैडम ने
शॉल उड़ा कर सम्मान किया तथा तनिषा मैडम ने उन्हे जैसलमेर के स्वतंत्रता सेनानी स्व आत्माराम गर्ग पर लिखी पुस्तक मरूभूमि के
मसीहा स्वतंत्रता सेनानी आत्माराम गर्ग भेट की तथा कॉचिंग डॉयरेक्टर सुरेन्द्र गर्ग ने उन्हे बेस्ट परफॉर्मर की ट्रॉफी भेट की।जगदीश चोयल
ने बताया की परिवर्तन संसार का नियम है और इस संसार में हर पल नए नए परिवर्तन होते रहते है मुझे भी पारिवारिक कारणों से अब मेरे
परिवार के पास जोधपुर जाना पड़ रहा है, परन्तु मेरा विश्वास क्लासेज से जो नाता वो आत्मा से जुड़ा में इसे कभी भुला नहीं सकता और मुझे
जब भी छुट्टियां मिलेगी में अपना पुरा समय विश्वास क्लासेज के छात्रों को दूंगा तथा समय समय पर ऑनलाइन माध्यम से बोर्ड के
विद्यार्थियो से जुड़ा रहूंगा तथा उनके पढाई से संबंधित सभी सवालों को हल करके दूंगा। तथा अभी विश्वास क्लासेज में नई फैकल्टी जो
सीकर से शिक्षक आए मुझे पूर्ण विश्वास है वो विश्वास क्लासेज की उत्कृष्ट परीणाम की परम्परा को जारी रखेंगे और विश्वास क्लासेज को
नई उच्चाइयों पे ले जाएंगे।छात्र के अभिभावक बताते हैं कि जगदीश चोयल जैसे अध्यापक देखने को बहुत कम मिलते है बच्चो को पढाई के
साथ जीवन जीने का सलीका सीखना तथा सब से महत्वपूर्ण मोरल शिक्षा देना जो आज के समय में बहुत महत्वपूर्ण हैं जोकि विश्वास
एकेडमी में ही सम्भव है।
बुला-बुलाकर बच्चों की एक्स्ट्रा क्लास लेते थे शिक्षक स्टाफ ने बताया कि शिक्षक जब भी स्कूल में बच्चों के कम मार्क्स देखते थे । वह
बच्चो को तुरन्त कोचिंग बुला देते थे चाहे कितनी भी रात हो। शिक्षक अपना अधिकतर समय विश्वास कोचिंग में ही व्यतीत करते हैं।चोयल
एक ऐसे शिक्षक थे जिनके पास एक उत्कृष्ट शिक्षक होने के सभी गुण मौजूद हैं इसलिए उन्होंने अपने कोचिंग की व्यवस्था भी बहुत अच्छी
रखी है ।
विदाई समारोह में नम हुईं बच्चों की आंखें विदाई समारोह में बच्चों एवं पूर्व छात्र-छात्राओं की आंखें नम हो गईं। बच्चों की आंखें नम होते
देख अभिभावक भी भावुक हो उठे। शिक्षक की विदाई समारोह कार्यक्रम के लिए सुबह से ही पूरा कोचिंग व्यवस्था में लगा हुआ था।कोचिंग
डॉयरेक्टर सुरेन्द्र गर्ग ने बताया कि कम संसाधनों में बेहतर शिक्षा देना उन्होंने अपना एकमात्र धर्म समझा था छात्र छात्राओं के भविष्य के
लिए दिन रात मेहनत करना आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चो को निःशुल्क पढ़ाना यह सभी गुण उनमें मौजूद थे विश्वास क्लासेज के प्रति
उनका समर्पण ही है जो आज बच्चो की आंखों से झलक रहा है।


