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चैक अनादरण मामले में एक साल का करावास व 12 लाख का जुर्माना

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मधुहीर राजस्थान
जोधपुर। परिवादी मोहम्मद उमर (गोल्डन प्रेस) निवासी-मोहल्ला लायकान से अभियुक्त लक्ष्मी नारायण पुत्र फुसाराम, निवासी-जी री हवेली, गुलाब सागर के मध्य मित्रता होने से अभियुक्त लक्ष्मी नारायण ने अपनी घरेलु आवश्यकता हेतु 10,00,000 रूपये उधार लिए जिसके पुनर्भुगतान हेतु अभियुक्त ने परिवादी मो. उमर को चैक संख्या 771951 दिनांक 11-09-2018 राशि 10,00,000 रूपये का चैक दिया। परिवादी मो. उमर ने उक्त चैक को भुगतान प्राप्ति हेतु अपनी बैंक में डाला, जिसे बैंक ने जरिये रिटर्निंग मेमो दिनाक 02-11-2018 को खाते में रिमार्क के साथ अनादरित कर लौटा दिया। उक्त चैक के अनादरित होने पर परिवादी द्वारा दिनांक 06-11-2018 को जरिये अधिवक्ता एक रजिस्टर्ड नोटिस अभियुक्त को प्रेषित किया एवं अभियुक्त के विरूध न्यायालय में वाद दायर होने पर परिवादी की ओर से अधिवक्ता अकिल अहमद ने पैरवी करते हुए कहा- अभियुक्त लक्ष्मीनारायण टाक ने अपने वैध ऋण या अन्य दायित्व के उन्मोचन पेटे राशि 10,00,000 रूपये का परिवादी को चैक दिया रिमार्क के साथ अनादरित हो गया। अधिवक्ता ने अदालत हाजरा से कहा कि अभियुक्त का कृत्य आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है। अतः अभियुक्त को कारावासी दण्ड एवं जुर्माने से दण्डित किया जावे एवं चैक की दुगुनी राशि परिवादी को दिलाई जावे।
विशिष्ठ महानगर संख्या-06 मजिस्ट्रेट मुकेश कुमार रेगर ने उभय पक्षों के तर्को पर गौर किया गया एवं पत्रावली का अध्ययन व अवलोकन किया, ओर कहा- वर्तमान में चैक अनादरण के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे है, इसी स्थिति को देखते हुए, अभियुक्त लक्ष्मी नारायण पुत्र फुसाराम को चैक अनादरण के मामले में दोषी मानते हुए, अपराध अंतर्गत धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 में एक वर्ष का साधारण कारावास तथा 12,00,000 रुपए (12 लाख) जुर्माना से दण्डित किया जाता है।

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