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मधुहीर राजस्थान
जोधपुर (बहादुर सिंह चौहान)। पश्चिम राजस्थान के चिकित्सा जगत में रविवार, 29 जून, 2025 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। मेड़ता निवासी 23 वर्षीय युवक, जो पिछले 7-8 वर्षों से घटती-बढ़ती श्रवण शक्ति (Fluctuating Hearing Loss) की समस्या से जूझ रहा था, उसे सारथी फाउंडेशन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरवेंशन एंड रिहैबिलिटेशन हॉस्पिटल, झालामंड, जोधपुर में एक सफल कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के बाद आज डिस्चार्ज किया जा रहा है। यह पश्चिम राजस्थान में अपनी तरह का पहला और बेहद जटिल मामला था, जिसने चिकित्सा विज्ञान के लिए एक नई राह खोली है।
जोधपुर (बहादुर सिंह चौहान)। पश्चिम राजस्थान के चिकित्सा जगत में रविवार, 29 जून, 2025 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। मेड़ता निवासी 23 वर्षीय युवक, जो पिछले 7-8 वर्षों से घटती-बढ़ती श्रवण शक्ति (Fluctuating Hearing Loss) की समस्या से जूझ रहा था, उसे सारथी फाउंडेशन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरवेंशन एंड रिहैबिलिटेशन हॉस्पिटल, झालामंड, जोधपुर में एक सफल कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के बाद आज डिस्चार्ज किया जा रहा है। यह पश्चिम राजस्थान में अपनी तरह का पहला और बेहद जटिल मामला था, जिसने चिकित्सा विज्ञान के लिए एक नई राह खोली है।
युवक की सुनने की समस्या इतनी विकट थी कि उसका सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। आवाजें कभी तेज सुनाई देती थीं, तो कभी बिल्कुल धीमी, जिससे संवाद करना और रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो गया था। यह समस्या कोक्लियर मेनियर रोग (Cochlear Meniere’s Disease) और एक बड़े एंडोलिम्फैटिक सैक (large Endolymphatic Sac) के कारण उत्पन्न हुई थी, जिसने मामले को और भी दुर्लभ बना दिया था।
रविवार को सारथी फाउंडेशन के विशेषज्ञों की टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया और एक मिसाल कायम की। ईएनटी सर्जन डॉ. शशांक वशिष्ठ, डॉ. प्रतीक शर्मा और ऑडियोलॉजिस्ट डॉ. भूपेन गहलोत के नेतृत्व में, एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. दिनेश जैन और रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. आनंद व डॉ. संदीप की टीम ने मिलकर यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की।
अब बारी ‘स्विच ऑन’ की: तीन हफ्तों बाद मिलेगी पूरी सुनने की शक्ति
सर्जरी का आंतरिक हिस्सा सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। अब, अगले तीन हफ्तों के बाद, युवक को कॉक्लियर इम्प्लांट का बाहरी प्रोसेसर लगाया जाएगा। यह “स्विच ऑन” की प्रक्रिया होगी, जिसके बाद उसे अपनी सुनने की शक्ति पुनः प्राप्त होगी। इस अवधि में, सर्जरी वाले स्थान को पूरी तरह से ठीक होने का समय मिलेगा, जो बाहरी प्रोसेसर के बेहतर प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण है। “स्विच ऑन” के बाद, ऑडियोलॉजिस्ट डॉ. भूपेन गहलोत, द्वारा प्रोसेसर की प्रोग्रामिंग और एडजस्टमेंट किए जाएंगे ताकि युवक को सर्वोत्तम श्रवण अनुभव मिल सके।
यह सफल सर्जरी न केवल युवक के लिए जीवन बदलने वाली थी, बल्कि यह पश्चिम राजस्थान में आधुनिक चिकित्सा के नए आयाम स्थापित करने वाली भी साबित हुई है। यह उन अनगिनत लोगों के लिए आशा की किरण है जो इसी तरह की बीमारियों से जूझ रहे हैं और जिन्हें अब अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपचार मिल सकेगा। सारथी फाउंडेशन ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता और विशेषज्ञता का परिचय देते हुए चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है।




