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चार साल लिव-इन में रहने वाले यूक्रेन के कपल ने हिंदू रीति-रिवाजों से लिए सात फेरे

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मधुहीर राजस्थान
जोधपुर। भारतीय विवाह पद्धति से प्रभावित यूक्रेन के जोड़े ने गुरुवार को यहां हिंदू रीति से सात फेरे लेकर जीवनसाथी बने। यह कपल चार साल से लिव इन में रह रहा था। दोनों भारतीय परंपराएं पसंद करते हैं इसलिए राजस्थान में परंपरागत ढंग से विवाह किया। विवाह के लिए जोधपुर के अलावा जयपुर और उदयपुर की लोकेशन भी देखी थी।
विवाह आयोजक व पयर्टन से जुड़े सुरेश विजयन ने बताया कि दूल्हा-दुल्हन भारतीय रीति रिवाज से ज्यादा प्रभावित है, इसलिए हर परंपरा का पालन किया गया। यूक्रेन निवासी 72 वर्षीय स्टानिस्लाव और 27 वर्षीय अनहेलीना कुछ समय से साथ रह रहे थे। दोनों ने भारतीय तरीके से विवाह का मन बनाया। इसके लिए कंपनी से संपर्क किया। कंपनी ने शादी के लिए तीन वेन्यू और सिटी सुझाई। अलग-अलग तरीके के वीडियो भिजवाए। अंत में अनहेलीना ने जोधपुर को चुना। इसके बाद दोनों अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ दिल्ली आए थे। बुधवार को जोधपुर आने के बाद विवाह की रस्में शुरू हुई।
दंपती ने भारतीय परंपरागत परिधान पहने। भारतीय धुनों पर ठुमके लगाए। यूक्रेन से आए स्टानिस्लाव जरदोजी वर्क की शेरवानी पहन दूल्हा बने व लाल सुर्ख रंग की जरी वर्क की राजपूती पोशाक पहने दुल्हन एंजेलिना ने सुबह हल्दी व मेहंदी की रीति रिवाज को पारंपरिक गीत के साथ निभाया। शाम को उम्मेद भवन से गाजे बाजे के साथ बारात निकली जो विवाह स्थल पर आई जहां दूल्हे ने तोरण मारा। दूल्हे को टीका लगाने के बाद वरमाला हुई। उसके बाद मंत्रोच्चार के बीच विवाह कार्य संपन्न हुआ। दूल्हे ने दुल्हन को मंगलसूत्र पहनाया और मांग भरी। अग्नि को साक्षी मांग कर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लेकर जन्म जन्मों का संकल्प लिया।
आकर्षित करती है मारवाड़ की संस्कृति
दिल्ली से साथ आए टूर गाइड रोहित व दीपक ने बताया कि जोधपुर की संस्कृति विश्व में लोगों को आकर्षित करती है। राजस्थानी पोशाक, लोक संगीत और पारंपरिक रस्मों के बीच आयोजित इस विवाह समारोह में दूल्हा-दुल्हन ने सात फेरे लेकर आजीवन साथ निभाने का संकल्प लिया। विवाह स्थल पर सजावट में भी मारवाड़ की झलक दिखाई दी, जिसमें पन्ना धरोहर, लोक वाद्य और पारंपरिक व्यंजन शामिल रहे। स्थानीय पर्यटन से जुड़े लोगों ने इस अनूठी शादी के साक्षी बनकर न केवल राजस्थान की संस्कृति का गर्व अनुभव किया, बल्कि यह भी सिद्ध हुआ कि मारवाड़ की परंपराएं विश्वभर में आकर्षण का केंद्र हैं।

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