पुलिया निर्माण में लापरवाही के चलते खजवाना बाईपास पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा।
हादसों को न्योता देती निर्माण शैली, आमजन में रोष
मधुहीर राजस्थान
कुचेरा रिपोर्टर महबूब खोखर
कुचेरा (नागौर)। कुचेरा शहर के खजवाना बाईपास पर बन रही पुलिया लापरवाही और अनियोजित निर्माण कार्य के चलते आम जनता की जान के लिए खतरा बन गई है। पुलिया निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिससे हादसों का खतरा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।
बीते सप्ताह खजवाना चौराया पर कार और बाइक की टक्कर में कुचेरा निवासी पप्पु लाल पुत्र देवीलाल माली (65 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई थी। यह हादसा पुलिया निर्माण के दौरान सड़क किनारे डाले गए मिट्टी के ऊंचे ढेर और दृश्यता बाधित होने के कारण हुआ।
मिट्टी के ढेर से बिगड़ी स्थिति
ब्रिज निर्माण के लिए खोदी गई मिट्टी को सड़क किनारे ऊंचे-ऊंचे ढेर के रूप में डाल दिया गया है। इन ढेरों के कारण सामने से आ रहे वाहन हाईवे पर नजर ही नहीं आते। नतीजा यह कि छोटे वाहन चालक और पैदल यात्री सीधे तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने का जोखिम उठाते हैं।
सुरक्षा इंतजाम नदारद
निर्माण स्थल पर बैरिकेट, चेतावनी संकेत बोर्ड या रिफ्लेक्टर तक नहीं लगाए गए हैं। रात के समय यह स्थिति और भी भयावह हो जाती है। स्थानीय लोग बार-बार इस खतरे की ओर ध्यान आकर्षित करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों में आक्रोश
गांव के लोगों का कहना है कि पुलिया निर्माण कार्य में बरती जा रही लापरवाही से हर रोज दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। अगर समय रहते मिट्टी हटाकर समुचित बैरिकेड और संकेतक नहीं लगाए गए तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रशासन से मांग
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग से तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
निष्कर्ष: खजवाना बाईपास पुलिया का निर्माण आमजन की सुविधा के लिए शुरू किया गया था, लेकिन वर्तमान हालात में यह सुविधा नहीं बल्कि दुर्घटनाओं का सबब बन चुका है। अब देखना होगा कि प्रशासन कब जागता है और इस जानलेवा लापरवाही पर कब अंकुश लगता है।

