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छत्रपति संभाजीनगर में तेरापंथ के देदीप्यमान महासूर्य का मंगलवार को महामंगल प्रवेश

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स्वागत में उमड़ा आस्था व श्रद्धा का ज्वार, भव्य स्वागत जुलूस ने किया महातपस्वी का अभिनंदन

छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र) रमेश भट्ट। महाराष्ट्र की धरा को पावन बनाने के लिए निरंतर गतिमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, राष्ट्रसंत आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में पधारे तो वर्षों से प्रतीक्षारत रत श्रद्धालु निहाल हो उठे। उनका आंतरिक उत्साह उनके बुलंद जयघोष में स्पष्ट दिखाई दे रहा था। महासंत द्वारा दोनों करकमलों से की जा रही आशीषवृष्टि उन्हें भीषण गर्मी में भी शीतलता प्रदान कर रही थी। तभी तो छत्रपति संभाजीनगर का जन-जन मानवता के मसीहा के झलक पाने को व्याकुल नजर आ रहे थे। भव्य व विशाल स्वागत जुलूस के साथ युगप्रधान आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में यहां अक्षय तृतीया जैसा महनीय कार्यक्रम भी समायोजित है। मंगलवार का सूर्योदय मानों छत्रपति संभाजीनगरवासियों के लिए विशेष था। आज यहां की चमक में आध्यात्मिकता की आभा भी दिखाई दे रही थी। जिसका प्रभाव था कि आसमान में चढ़ते सूर्य की तीखी किरणें भी आज आस्था भावों के उमड़ते ज्वार को रोक पाने में नाकाफी नजर आ रही थीं। मंगलवार को प्रातःकाल की मंगल बेला में तेरापंथ धर्मसंघ के देदीप्यमान महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल रश्मियों के साथ शहर प्रवेश हेतु गतिमान हुए। वर्षों की प्रतीक्षा के साकार होने की घड़ी जैसे-जैसे निकट आती जा रही थी और ज्योतिचरण जैसे-जैसे नगर के निकट होते जा रहे थे, श्रद्धालुओं की आस्था व उमंग की लहरें भी ऊंची होती जा रही थीं। देवलाई से लगभग बारह किलोमीटर का विहार कर युगप्रधान आचार्यश्री का चरणों का स्पर्श जैसे ही संभाजीनगर में हुआ, पूरा वातावरण बुलंद जयघोष से गुंजायमान हो उठा। भव्य, विशाल व विराट स्वागत जुलूस के साथ युगप्रधान आचार्यश्री छत्रपति संभाजीनगर के गोलवाड़ी में नवनिर्मित तेरापंथ भवन में पधारे। इस दौरान आचार्य महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष श्री सुभाष नाहर आदि भवन से संबद्ध जनों ने गुरुदेव से मंगलपाठ श्रवण कर भवन का लोकार्पण किया।

इसके पूर्व लगभग उनहत्तर वर्ष पूर्व तेरापंथ के नवमाधिशास्ता आचार्यश्री तुलसी का यहां पदार्पण हुआ था। श्रद्धालु जनता की इतने वर्षों की प्यास मानों महामेघ महाश्रमण की आशीषवृष्टि से तृप्ति प्राप्त कर रही थी। इतना ही नहीं आचार्यश्री के स्वागत में केन्द्रीय व प्रदेश स्तर के अनेक गणमान्य व विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु भी उपस्थित थे।नवनिर्मित तेरापंथ भवन प्रांगण में उपस्थित विशाल जनमेदिनी को प्रथम पावन पाथेय प्रदान करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि आगम में कहा गया है कि पुरुष तुम सत्य को सच्चाई को जानो। सच्चाई की साधना के लिए आदमी को अभय की साधना करने का प्रयास होना चाहिए। सच्चाई की साधना में कुछ कठिनाई अवश्य आ सकती है, किन्तु अंतिम विजय भी सच्चाई की ही होती है। बल और पौरुष हो तो सच्चाई की साधना अच्छी हो सकती है। सच्चाई की साधना से परम शांति का तत्त्व प्राप्त हो सकता है। आदमी को बेइमानी और झूठ बोलने से बचने का प्रयास करना चाहिए। यहां तक कि संप्रदाय से भी सच्चाई बड़ी होती है। इसलिए आदमी को सच्चाई को स्वीकार करने व उसके मार्ग पर आगे बढ़ने का प्रयास होना चाहिए। आचार्यश्री ने आगे कहा कि वर्तमान समय में भारत वर्ष में लोकसभा का चुनाव हो रहा है। जगह-जगह सभाएं हो रही हैं। ऐसे में यह ध्यान देना चाहिए कि किसी पर झूठा आरोप न लगे। झूठी बातों द्वारा किसी पर प्रहार न हो, ऐसा प्रयास करना चाहिए। झूठा आरोप लगाना, किसी का झूठा प्रचार करने से जिह्वा ही आत्मा भी अपवित्र हो जाती है। इसलिए यहां भी सच्चाई को सर्वोच्च रखने का प्रयास करना चाहिए।

साथ ही आचार्य श्री ने कहा कि आज औरंगाबाद आना हो गया। यहां अक्षय तृतीया का आयोजन होना है। अक्षय तृतीया भगवान ऋषभ से जुड़ा हुआ पर्व है। वे अध्यात्म के अधिनेता परमपुरुष थे। वर्षीतप के पारणे भी अक्षय तृतीया से जुड़े हुए है। उनहत्तर वर्ष पूर्व आचार्य श्री तुलसी यहां पधारे और यहां आगम संपादन योजना की मानों शुरुआत हुई। आगम संपादन की घोषणा यहां हुई। आचार्य श्री तुलसी ने जो महान स्वप्न संजोया उसके तहत आज कितने आगम ग्रंथ भी प्रकाशित हुए हैं और कार्य गतिमान है। चतुर्दशी के संदर्भ में आचार्यश्री ने हाजरी वाचन का क्रम भी पूरा किया। तदुपरान्त उपस्थित चारित्रात्माओं ने अपने स्थान पर खड़े होकर लेखपत्र का उच्चारण किया। आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने छत्रपति संभाजीनगरवासियों को उद्बोधित किया। मंगल प्रवचन से पूर्व डॉ. भूमरे ने आचार्यश्री के स्वागत में अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम में आचार्य महाश्रमण अक्षय तृतीया प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष श्री सुभाष नाहर ने स्वागत में अभिव्यक्ति दी। मुस्लिम धर्म के धर्मगुरु इमाम संगठना के प्रमुख मौलाना हबीद अंसारी, ईसाई धर्मगुरु बीसब कसाब, मारवाड़ी सभा के अध्यक्ष श्री पुरुषोत्तम दरक, सकल जैन समाज के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र दर्डा ने भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मण्डल की बहनों ने स्वागत गीत का संगान किया।
इस अवसर पर शहर के अनेक गणमान्य भी स्वागत हेतु उपस्थित थे। जिसमें केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री श्री भागवत कराद, राज्य मंत्री श्री संदीपान भुमरे, राज्य मंत्री श्री अतुल जी सावे, पूर्व मंत्री श्री राजेंद्र दर्डा, पूर्व सांसद श्री चंद्रकांत खैरे, मंत्री श्री संजय सिरसाट, एमएलए श्री प्रशांत बंब, पूर्व महापौर राजेंद्र जंजाळ, बापू घडामोड़े, एमएलए प्रदीप जायसवाल आदि उपस्थित थे। साथ ही महाराष्ट्र ऑल मस्जिद के इमाम मौलाना हाफिज, बिशप कसाबसाब, वारकारी संप्रदाय से अशोक अंधेले, जस्टिस चांदीवाल आदि अनेक गणमान्य ने गुरुदेव का स्वागत किया। सकल जैन समाज के सचिव महावीर पाटनी ने मंच संचालन किया। इस अवसर पर गुरुदेव के सान्निध्य में जैन विवेक पत्रिका का भी विमोचन हुआ। अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रमेश डागा ने आचार्य श्री के दीक्षा कल्याण महोत्सव के युवादृष्टि विशेषांक ‘चमन के बागवान ’गुरु चरणों में अर्पित किया एवं भावाभिव्यक्ति दी।

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