अलग-अलग प्रदेशों से एक साथ दबोचे गए
फलोदी (पारस लूंकड़)। विकासकुमार, महानिरीक्षक पुलिस, जोधपुर रेंज ने बताया कि तेलंगाना, ओडिशा, पंजाब से तीन अपराधियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। ये तीनों अन्तरर्राज्यीय कुख्यात एक लाख बीस हजार के इनामी अपराधी 12 साल से हत्या व लूट के प्रकरण में अन्य राज्यों में फरारी काट रहे है। कुमार ने बताया कि रेंज स्तर पर जिला पुलिस के समन्वय में ऑपरेशन लल्लन टॉप गत दो माह से छद्म रूप से चल रहा था। इस ऑपरेशन के माध्यम से यह सिद्ध होता है कि कानून के हाथ लम्बे होते है। “अपराधी देर तक एवं दूर तक भाग सकता है, परन्तु पुलिस से सदा के लिए बचकर नहीं भाग सकता।” कुमार ने बताया कि 12 वर्ष पूर्व जिला फलोदी के खींचन गांव में सोनामुखी की फैक्ट्री के मुनीम कोजाराम की निर्मम हत्या की गई थी। मुनीम कोजाराम के अधीन काम करने वाले तीन बिहारी मजदूरों द्वारा मुनीम को पैसों के लालच में आकर मुनीम के हाथ पांव बांधकर मौत घाट उतारकर सोनामुखी के बोरे में डालकर अन्य बोरे के मध्य में डाल दिया।

शव का पता हत्या के दो दिन बाद चला। जिले की अपराध समीक्षा बैठक में पुलिस महानिरीक्षक एवं श्रीमती पूजा अवाना, जिला पुलिस अधीक्षक, फलोदी के बीच गहन विमर्श से सामने आया कि पुलिस अनुसंधान में पता चला कि मुनीम की निर्मम हत्या ‘तीनों बिहारी मजदूरों द्वारा की गई है और हत्या के पश्चात तीनों राज्य को छोडकर अन्यत्र भाग गए है। पुलिस के सामने चुनौती थी, क्योंकि ना कोई हुलिया, ना कोई तस्वीर, ना पुख्ता जानकारी ना ही कोई मोबाइल नम्बर। अपराधी एक साथ रहते थे, किसी माध्यम से कुख्यात इनामी अपराधियों तक पहुंचा नहीं जा सकता था। तीनों कुख्यात अपराधी अपने परिवार से दूर रहकर जीवनयापन कर रहे थे।
- लालदेव पुत्र जयसी सहनी, निवासी धमोली, जिला मुजफ्फरपुर, बिहार।
- उदय उर्फ गणेश उर्फ गोनू पुत्र नगेश्वर, सहनी, निवासी धमोली, जिला मुजफ़्फरपुर, बिहार ।
- नरेश पुत्र जयसी सहनी, निवासी धमोली जिला मुजफ्फरपुर, बिहार।
कुमार ने बताया कि इस ऑपरेशन को अंजाम देने में रेंज स्तरीय 12 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों, जिसमें साईक्लोनर टीम के तीन सदस्य, स्ट्रंग टीम के तीन सदस्य, टॉरमेडो टीम के तीन सदस्य एवं जिला फलोदी विशेष टीम के दो सदस्यों ने अदम्य साहस, असीम धैर्य, विलक्षण ‘बुद्धिमता एवं अद्भूत पेशेवर दृष्टिकोण का परिचय दिया। ऑपरेशन लल्लन टॉप के अन्तर्गत तकनीकी आसूचना, मानवीय आसूचना एवं ऑपरेशन व्यूह रचना की जबरदस्त त्रिवेणी रची गई। चार अलग-अलग टीमें बनाकर पंजाब, बिहार एवं तेलंगाना रवाना की गई। कुमार के निर्देशन रेंज स्तरीय टीम द्वारा ऑपरेशन व्यूह रचना के अन्तर्गत पुलिस कर्मियों ने ठेले पर नारियल पानी बेचने वाले बने, भैंस चराने वाला चरवाहा बने, गाय को चराने एवं दूध निकालने वाला ग्वाला बने, ईंट एवं भट्टों पर काम करने वाला मजदूर बने, क्योंकि तीनों कुख्यात अपराधियों की तस्वीर नहीं होने के चलते, ना कोई पुख्ता जानकारी नहीं थी तथा उनके ठिकानों में घुसकर उनकी पहचान करनी थी। अपराधियों के ठिकानों में घुसकर उनके दैनिक कार्यों को समझकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। कुमार ने बताया कि अभी तक की पूछताछ में सामने आया कि इनके द्वारा हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, ठगी, नक्सलियों के लिए पैसा वसूली जैसी आधा दर्जन वारदातें कबूली गईं हैं। परिवार की आपराधिक पृष्ठभूमि भी सामने आई हैं। दो अन्य भाईयों पर बीसियों प्रकरण ‘दर्ज हैं। पूछताछ में आगे भी संगीन वारदातें खुलने की उम्मीद हैं। पूजा अवाना, जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा बताया गया कि नक्सलियों से संबंध के बारे में गंभमीरता से पूछताछ की जाएगी।


