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महरानगढ़ में हर्षोल्लास से मनाया 566वां जोधपुर स्थापना दिवस

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मातृ भाषा में ही हमारे संस्कार विद्यमान 18 प्रतिभाएँ मारवाड़ रतन पुरस्कार से हुई सम्मानित

जोधपुर। 12 मई/566वां जोधपुर स्थापना दिवस समारोह महरानगढ़ में हर्षोल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि जोधपुर के सूरसागर विधानसभा के विधायक श्री देवेन्द्र जोशी ने कहा हमारी मातृ भाषा में ही हमारे संस्कार विद्यमान है। यदि मातृ भाषा विलुप्त हो गई तो संस्कार खत्म हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि यहाँ का अपनत्व, मीठी बोली, संस्कार यहाँ की नींव में विद्यमान है। साथ ही उन्होंने कहा कि समाज सेवा के क्षेत्र में जो जज्बा जोधपुरवासियों में है वह अन्यत्र देखने को नहीं मिलता। इस अवसर पर उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज मारवाड़ धीरे-धीरे विभिन्न प्रकार के नशे की गिरफ्त में आ रहा है जिसमें अधिकाधिक संख्या में युवा है। इसलिए नशे की प्रवृति को आगे बढ़ने से रोकना होगा। जोधपुर के इस स्थापना दिवस पर हमें संकल्प लेना होगा कि हम भावी पीढ़ी को नशे से मुक्त कर मारवाड़ को नशा मुक्त करेंगे और इस सम्बन्ध में उनसे जितना हो पायेगा वे करेंगे। समारोह अध्यक्ष एवं मुख्य प्रबन्ध न्यासी महरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट महाराजा श्री गजसिंहजी ने कहा कि युवा पीढ़ी को इतिहास और संस्कृति से रूबरू करवाना आवश्यक है तभी हम हमारे प्राचीन संस्कार, संस्कृति, इतिहास, विरासत को बचा पायेंगे। हमें हमारे प्राचीन शहर के परकोटे की पहचान को बनाये रखना होगा जो वर्तमान में विलुप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि निःसंदेह आप समय के साथ आधुनिक बने और घरों को आधुनिकता के साथ बदलाव करें लेकिन उसके बाहरी मूल स्वरूप को यथावत रखें। साथ ही उन्होंने किला रोड़ पर हो रहे अतिक्रमणों पर भी चिंता जाहिर की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के साथ ही राजस्थानी भाषा को राज की दूसरी भाषा में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने इस अवसर पर सभी को धन्यवाद दिया और महाराजा हनवन्तसिंहजी के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित आयोजन में सहभागिता निभाने हेतु सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
वीर शहीदों को श्रद्धांजलि एवं मुख्य समारोह का प्रारम्भ महरानगढ़ म्यूज़ियम ट्रस्ट के महाप्रबन्धक जगतसिंह राठौड़ ने बताया कि जोधपुर स्थापना का समारोह शहीद श्री ताराचंदजी एवं मेजर शैतानसिंहजी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि से प्रारम्भ हुआ। इस अवसर पर महाराजा श्री गजसिंहजी व पुलिस विभाग के प्रतिनिधि तथा राजपूत समाज के विभिन्न सरदारों के प्रतिनिधियों द्वारा अर्पित की गई। तत्पश्पात् जसवन्तथड़ा पहाड़ी पर स्थित राव जोधाजी की अष्वारूढ़ मूर्ति पर, महरानगढ़ दुर्ग के बाहर स्थित मारवाड़ के अमर शहीद गुमानसिंह राजपुरोहित, इन्द्रराज सिंधी, ठा. श्यामसिंह चौहान राखी, दुर्गादास खीची की छतरियों पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए महाराजा श्री गजसिंहजी, सभी अतिथि व शहर के प्रतिष्ठित गणमान्य नागरिकों ने मारवाड़ के वीर शहीदों को पुष्पाजंलि अर्पित की। तत्पश्चात् महरानगढ़ के भीतर श्री किरतसिंहजी सोढ़ा की छतरी, झूंझार कुं. बहादुरसिंह तंवर की तस्वीर तथा शहीद भूरे खां की मजार पुष्पांजलि अर्पित की गई। उसके बाद महाराजा श्री गजसिंहजी राव जोधाजी के फलसे पर पूजा-अर्चना हेतु पधारे, जहाँ पण्डितों द्वारा विधिवत् पूजा अर्चना की गयी। राव जोधाजी के फलसे की पूजा के बाद महाराजा श्री गजसिंहजी व अतिथियों द्वारा श्री राजारामजी मेघवाल को पुष्पांजलि अर्पित की गई। लोहा पोल स्थित मल्लीनाथ एवं सती स्मारकों पर भी पुष्पांजलि एवं श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके पश्चात् रासोलाई तालाब के सामने मुख्य समारोह स्थल पर पधारे जहाँ पर मुख्य समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ महाराजा श्री गजसिंहजी एवं मुख्य अतिथि देवेन्द्र जोशी द्वारा जोधपुर के संस्थापक राव जोधाजी की तस्वीर व माँ सरस्वती की मूर्ति पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई। इसके बाद जोधपुर स्थापना दिवस समिति के सचिव प्रो. जहूर खां मेहर द्वारा स्वागत उद्बोधन दिया जिसमें उन्होंने महाराजा श्री गजसिंहजी को धन्यवाद दिया कि वे लगातार मारवाड़ की सांस्कृतिक परम्पराएँ व रीति-रिवाजों का वे निर्बाध रूप से निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने मारवाड़ रतन सम्मान की कमेटी के सदस्यों को भी धन्यवाद दिया कि उन्होंने मारवाड़ की विलक्षण प्रतिभाओं का चयन किया। उन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए आमजन को इस समारोह में सम्मिलित होने के लिए धन्यवाद दिया।


विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त 18 लोगों को मारवाड़ रत्न सम्मान इस समारोह का प्रमुख आकर्षण प्रतिष्ठित मारवाड़ रत्न सम्मान अतिथियों द्वारा प्रदान किये गये। इस वर्ष 18 प्रतिभाओं का सम्मानित किया गया जिनमें राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर न्यूरोलॉजी चिकित्सा के क्षेत्र में स्थायी महत्व की दीर्घकालीन उच्च स्तरीय व उत्कृष्ट योगदान के उपलक्ष्य में निदेशक न्यूरोलॉजी, बॉम्बे हॉस्पिटल इंस्टीट्युट ऑफ मेडिकल सांइस डॉ. भीम सेन सिंघल को राव सीहाजी सम्मान, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विदेषी मूल के नागरिक द्वारा मारवाड़ के लिए स्थायी महत्व की उच्च स्तरीय सेवाओं के लिए दी हेलन हैमलिन ट्रस्ट की चैयरपर्सन लेडी हेलन हैमलिन को महाराजा सर प्रतापसिंहजी सम्मान, समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए नवजीवन संस्थान के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र परिहार को राव जोधाजी सम्मान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए गति शक्ति विश्वविद्यालय, वडोदरा के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज चौधरी को महाराजा हनवन्तसिंहजी सम्मान, सामान्य नागरिक अथवा रक्षाकर्मियों के लिए असाधारण बहादुरी के क्षेत्र में सेवा मेडल से सम्मानित ब्रिगेडियर विक्रम शेखावत को मेजर दलपतसिंहजी (एम.सी.) सम्मान, संरक्षण, जीर्णोद्धार, संग्रहालय विज्ञान, डिजाइन और पारम्परिक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय योगदान हेतु मुम्बई के छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय के महानिदेशक श्री सब्यसाची मुखर्जी को कुंवर करणीसिंह जसोल सम्मान, राजस्थानी लोक संगीत एवं जातीय संगीत की विद्या और मौखिक परम्पराओं के उन्नयन में स्थायी महत्व के दीर्घकालीन उच्च स्तरीय योगदान के लिए जोधपुर राजस्थान अन्तर्राष्ट्रीय लोक महोत्सव (रिफ) के निदेशक श्री दिव्य भाटिया को पद्मश्री कोमल कोठारीजी सम्मान, राजस्थानी लोक संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रसिद्ध भारतीय टीवी कलाकार एवं राजस्थानी लोक गायिका श्रीमती इला अरूण को महाराजा विजयसिंहजी सम्मान, शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं दीर्धकालीन उच्चस्तरीय योगदान के लिये राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक व वरिष्ठ लेखक श्री गुलाब कोठारी को महाराजा मानसिंहजी सम्मान, मानव निर्मित एवं प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान एवं संरक्षण के क्षेत्र सीपीडब्ल्युडी के सेवानिवृत्त स्पेशल महानिदेशक श्री पुष्पेन्द्र सिंह चौहान को एच.एच. महाराजा उम्मेदसिंहजी सम्मान, महिला सशक्तिकरण की दिशा में उत्कृष्ट योगदान एवं स्थायी महत्व की दीर्घकालीन उच्च स्तरीय सेवाओं के लिए जोधपुर में कार्यरत दिव्यालोक सेवा संस्थान को राजदादीसा बदन कंवर भटियाणीजी सम्मान, मारवाड़ में बालिका शिक्षा के क्षेत्र में दी गई स्थायी महत्व की दीर्घकालीन उच्च स्तरीय सेवाओं के लिए राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल की संस्थापक प्रिंसीपल श्रीमती ज्योत्सना बरार को एच.एच. राजमाता कृष्णाकुमारीजी सम्मान, क्षेत्रीय संस्कृति और विरासत संरक्षण एवं संवर्द्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए जोधपुर के इण्टैक नई दिल्ली के नेचुरल हैरिटेज डिविजन के निदेशक श्री मनु भटनागर को एच.एच. महाराजा गजसिंहजी (द्वितीय) सम्मान, घुड़सवारी की ड्रेसाज स्पर्धा में 19वें एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता के द्वारा राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर किये गये उत्कृष्ट प्रदर्षन के उपलक्ष्य में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित सुश्री दिव्यकृति सिंह राठौड़ को चिरंजीव युवराज शिवराजसिंहजी सम्मान, पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए हरदेव जोशी विश्वविद्यालय ऑफ जर्नलिज्म एण्ड मास कम्युनिकेशन के संस्थापक कुलपति एवं वरिष्ठ पत्रकार, संपादक व आलोचक श्री ओम थानवी को मुहता नैणसी सम्मान, राजस्थानी भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिये राजस्थानी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं बाबा रामदेव शोधपीठ के निदेशक और हाल ही में साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित डॉ. गजेसिंह राजपुरोहित को पद्मश्री सीतारामजी लालस सम्मान, राजस्थानी भाषा (काव्य) साहित्य के उन्नयन में स्थायी महत्व की दीर्घकालीन उच्च स्तरीय सेवाओं के उपलक्ष्य में राजस्थानी के मूर्धन्य लेखक, कवि, समालोचक तथा चारण साहित्य के विद्वान श्री गिरधर दान रतनू को डॉ. नारायणसिंहजी भाटी ‘मालूंगा’ सम्मान तथा जयपुर के झोंटवाड़ा में स्थित पंजाब नेशनल बैंक में हुई डकैती में हथियारबंद लूटेरों से भिड़कर अपनी जान जोखिम में डालकर अनेक लोगों की जान एवं डकैती को बचाने के असाधारण एवं शौर्यपूर्ण कार्य के उपलक्ष्य में श्री नरेन्द्र सिंह शेखावत को राजारामजी मेघवाल सम्मान से सम्मानित किया गया। पुरस्कार के तहत नगद राशि, शॉल, श्रीफल व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। सरोद वादन की प्रस्तुति इस अवसर पर युवा सरोद वादक निज़ार खान द्वारा सरोद पर ‘मिया की तोड़ी की संगीतमय प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ तबले पर मोहम्मद कैफ ने संगत की। पुस्तक का लोकार्पण  समारोह में डॉ. महेन्द्र सिंह तँवर द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘जोधपुर दुर्ग: महरानगढ़’ का लोकार्पण मुख्य अतिथि देवेन्द्र जोशी एवं महाराजा साहब द्वारा किया गया। डॉ. तंवर द्वारा 10 वर्षों के अथक शोध के पश्चात् लिखित इस पुस्तक में ऐतिहासिक महरानगढ़ के निर्माण में योगदान देने वाले गजधर से लेकर कामदारों के काम, सामग्री व निर्माण की प्रक्रिया का सतत वर्णन किया गया है।
‘मैं थांसूं दूर नहीं: लेगेसी ऑफ महाराजा हनवन्तसिंह’ डॉक्युमेण्ट्री यू ट्युब पर वर्ल्ड वाइड लॉन्च एवं फोटो संस्करण लॉन्च इस अवसर पर महरानगढ़ म्यूज़ियम ट्रस्ट द्वारा प्रस्तुत एवं अभिमन्यु कानोडिया द्वारा निर्देशित एवं कई पुरस्कारों से सम्मानित डॉक्युमेण्ट्री फिल्म ‘‘मैं थांसूं दूर नहीं: लेगेसी ऑफ महाराजा हनवन्तसिंह’’ को महरानगढ़ म्यूज़ियम ट्रस्ट के यू ट्युब पर महाराजा गजसिंहजी द्वारा वर्ल्ड वाइड लॉन्च किया गया। इसमें महाराजा हनवन्तसिंहजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालती इस डॉक्युमेण्ट्री फिल्म ने अब तक कई राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार प्राप्त कर लिये है। इसी अवसर पर मयूर चौपासनी विद्यालय के संपादकीय मण्डल के विद्यार्थियों द्वारा महाराजा हनवन्तसिंहजी शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ‘‘अ शॉर्ट यट एक्स्ट्रा ऑर्डनरी लाइफ: महाराजा हनवन्तसिंह’’ फोटो संस्करण तैयार किया गया है इस फोटो संस्करण का लोकार्पण महाराजा श्री गजसिंहजी द्वारा किया गया। इस फोटो संस्करण को तैयार करने में विद्यार्थीगण लक्ष्य जैन, कट्टामुरू पद्मा लितिका, नेत्रा माहेश्वरी, मानसी राठौड़, जसमेर सिंह राठौड़, नक्षत्रराज राठौड़ और गुरूजनों में खुशबू राठौड़, ईशा गहलोत और भोमसिंह राठौड़ ने अहम योगदान दिया। कार्यक्रम के अन्त में महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र के सहायक निदेशक डॉ. महेन्द्रसिंह तंवर द्वारा सभी अतिथियों, पुरस्कार विजेताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर महारानी श्रीमती हेमलता राज्ये, स्वामी अचलानन्द गिरिजी महाराज, जोधपुर के गणमान्य नागरिकों में पद्मभूषण डॉ. नारायणसिंह माणकलाव, ब्रिगेडियर शक्तिसिंह, एम.एल. बाफना, प्रसन्नपुरी गोस्वामी, भागीरथ वैष्णव, मेजर जनरल शेरसिंह, मोहनसिंह रतनू, नरपतसिंह राजपुरोहित, कुलदीपसिंह राठौड़, भंवरलाल सुथार, डॉ. विक्रमसिंह गुन्दोज, मगनसिंह, मयूर चौपासनी विद्यालय के विद्यार्थीगण, इत्यादि के साथ ही कई गणमान्य नागरिक उपस्थित हुए।
कार्यक्रम का संचालन नेमीचन्दजी ने अपनायत से भरी मनमोहक राजस्थानी भाषा में किया। अन्त में महरानगढ़ बैण्ड द्वारा राष्ट्रगान की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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