जोधपुर (कासं)। गंगा सप्तमी का पर्व आज जोधपुर में श्रृद्धा एवं भक्ति भाव के साथ मनाया गया। प्राचीन तीर्थ अरणा झरना तथा बैरी गंगा में डुबकी लगा कर तथा भगवान सूर्य को जल अर्पित कर लोगों ने परिवार, समाज देश व समस्त विश्व में अमन व शांति का कामना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति गंगा नदी में स्नान करता है, उसको अपने पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो लोग इस अवसर पर गंगा स्नान को नहीं जा सकते वे अपने ही शहर के पवित्र जलाशयों में स्नान कर गंगा स्नान का लाभ प्राप्त करते हैं। गंगा सप्तमी पर स्नान और दान का विशेष महत्व होता है।
हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर गंगा सप्तमी मनाई जाती है। इस बार गंगा सप्तमी 14 मई, मंगलवार को मनाई गई ।सनातन धर्म में गंगा नदी को बेहद पवित्र नदी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति गंगा नदी में स्नान करता है, उसको अपने पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा की विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदाई माना गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, गंगा सप्तमी हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है, जो इस बार 13 मई 2024, दिन सोमवार की रात 2:50 बजे से शुरू हो गई । इसका समापन 15 मई, बुधवार की सुबह 4:19 बजे होगा। पंडित दामोदर भारद्वाज के अनुसार, गंगा सप्तमी आज 14 मई को मनाई गई।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां गंगा पर्वत राज हिमालय और देवी मैना की पुत्री है। प्रचलित मान्यता है कि माता गंगा देवी पार्वती की बहन हैं। प्रचलित मान्यता है कि सबसे पहले मां गंगा भगवान ब्रह्मा के कमंडल में निवास करती थीं और वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर वे भगवान ब्रह्मा के कमंडल से निकलकर प्रवाहित हुईं थी। इसी समय से इस तिथि को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। जोधपुर में इलाज लोगों ने जमकर दान-पुण्य भी किया। मन्दिरों में जाकर हरि दर्शन का लाभ भी उठाया।


