चिकित्सक को नियुक्ति नहीं देने का मामला
जोधपुर। राजस्थान हाइकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद सहायक प्रोफेसर (सुपर स्पेशियलिटी) पद पर नियुक्ति नहीं देने पर चिकित्सा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह व आरपीएससी सचिव रामनिवास मेहता सहित अन्य अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा हैं। वरिष्ठ न्यायाधीश दिनेश मेहता ने डॉ. मोना सूद की अवमानना याचिका पर यह आदेश दिया।
अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने बताया कि उदयपुर निवासी याचिकाकर्ता डॉ. मोना सूद ने एमबीबीएस जनरल मेडिसिन में स्नाकोत्तर पीजी डिग्री लेने के बाद एंडोक्रिनोलॉजी विशेषज्ञता में सुपर स्पेशलिटी डीएम कोर्स उत्तीर्ण कर रखा है। डॉ. मोना सूद ने राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा सहायक प्रोफेसर (सुपर स्पेशियलिटी) के एक पद हेतू आवेदन मांगे जाने पर आवेदन किया। उक्त सम्पूर्ण चयन प्रक्रिया के पश्चात डॉ. मोना सूद को प्रतीक्षा सूची में प्रथम स्थान पर चयनित किया गया। मुख्य सूची में चयनित अभ्यर्थी द्वारा जॉइन नहीं करने पर नियमानुसार याची के ही एक मात्र हकदार अभ्यर्थी होने के बावजूद उसे नियुक्ति नहीं देने पर अधिवक्ता खि़लेरी के माफऱ्त रिट याचिका पेश की। हाइकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने गत वर्ष एक दिसंबर को रिट याचिका स्वीकार कर तीन माह के भीतर सहायक प्रोफेसर एंडोक्रिनोलोजी विषय में नियुक्ति देने के आदेश दिए। इसके बावजूद निर्धारित समय निकलने के, चिकित्सा विभाग ने नियुक्ति हेतु कोई कार्यवाही नहीं की, जिस पर अवमानना याचिका दायर कर रिपोर्टेबल निर्णय की पालना करवाने हेतू गुहार लगाई गई। अवमानना मामले की अगली सुनवाई 26 जुलाई को होगी।


