नक्सलियों व माओ उग्रवादियों के खात्मे के लिए भाटी ने ग्रेहाउंड ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से विशेष बल के हजारों युवाओं को किया था प्रशिक्षित प्रारंभ मे आईबी में रहे अधिकारी व बाद में ग्रेहाउंड रीजनल ट्रेंनिंग सेंटर में विशेष अधिकारी के रूप में दी सेवाएं
मधुहीर राजस्थान
जोधपुर। जोधपुर के झीपासनी गांव में जन्मे पद्मश्री नारायण सिंह भाटी की प्रतिमा का शनिवार को तेलगाना के ग्राउंड्स रीजनल ट्रेंनिंग सेंटर प्रेमावतीपेट , हैदराबाद में लोकार्पण हुआ। तेलंगाना पुलिस महानिदेशक श्री रवि गुप्ता ने प्रतिमा का अनावरण किया। प्रारम्भ में आई बी में अधिकारी रहे। पद्मश्री नारायण सिंह भाटी का जन्म 18 मई 1931 को जोधपुर के निकट झीपासनी गांव में हुआ था। सुमेर स्कूल से स्कूली शिक्षा व आगे बीएससी, एलएलबी पूरी करके 1 अक्टूबर 1953 को सहायक केंद्रीय खुफिया अधिकारी के रूप में भारत के इंटेलिजेंस ब्यूरो में शामिल हुए और नटुलापास, सिक्किम, तिब्बत और लद्दाख जैसे सबसे कठिन और सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में 13 वर्षों तक सेवा की। उन्होंने 1966 से उत्तराखंड के ग्वालडन में फ्रंटियर अकादमी में 10 वर्षों तक डीवाईएसपी प्रशिक्षक के रूप में कार्य किया।
भारत सरकार द्वारा पुलिस पदक से सम्मानित हुए। भाटी को 1953 से 1989 तक बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा भारतीय पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। कई प्रतिष्ठित पद और पुरस्कार प्राप्त करने वाले भाटी 31 मई 1989 को को सेवानिवृत्त हुए। 2011 में पद्मश्री से सम्मानित। 2011 में भारत सरकार ने भाटी को राष्ट्र और समाज की सुरक्षा संबंधी उनकी विशेष सेवाओं के लिए पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया।
हजारों युवाओं को आतंकवाद से लड़ने का कड़ा प्रशिक्षण देकर द्रोणाचार्य की भूमिका निभाई
भाटी इंटेलिजेंस ब्यूरो और सशस्त्र सीमा बल में विशिष्ट भूमिकाओं के बाद अक्टूबर 1989 में सेवानिवृत्त हो गए। नक्सलियों से आंध्र तथा तेलंगाना प्रभावित थे। दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थीं अनिश्चितता, भय को दूर करने, शांति और सुरक्षा स्थापित करने के इरादे से के.एस.व्यास आईपीएस ने सरकार की मदद से ग्रेहाउंड्स नामक एक संगठन की स्थापना की के.एस.व्यास ने श्री भाटी के प्रशिक्षण में लंबा अनुभव, समर्पण और प्रतिबद्धता को देखते हुए 3 अक्टूबर 1989 को प्रशिक्षण सलाहकार के रूप में ग्रेहाउंड में शामिल किया गया था । व्यास और भाटी 30 युवा अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से प्रशिक्षण शुरू किया। ग्रेहाउंड्स बलों को ऐसे योद्धाओं के रूप में प्रशिक्षित किया । श्री केएस व्यास आईपीएस की वीरतापूर्ण मृत्यु के बाद भाटी पर इसकी जिम्मेदारी आयी। उन्होंने ग्रेहाउंड्स को किसी भी स्थिति में बिना किसी की मदद और सहयोग के बढ़त हासिल करने के लिए मजबूत किया, मंजिल ग्रेहाउंड्स को अजेय के रूप में तैयार किया गया था।भारत सरकार ने ग्रेहाउंड्स विभाग को वर्ष 2016 के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण केंद्र का पुरस्कार देने की घोषणा की।

महज 30 लोगों से शुरुआत कर विकट परिस्थितियों में भी सफलता हासिल करते हुए आज पूरे देश में पहचान पाने के पीछे भाटी के प्रयास ही सबसे अहम हैं, के बाद, वह आंध्र प्रदेश ग्रेहाउंड्स कमांडो फोर्स सुरक्षा हजारों युवाओं को माओवादी उग्रवादी के उन्होंने अनुकरणीय समर्पण, समर्पण के साथ जंगल युद्ध में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आईपीएस अधिकारियों, डीएसपी, उप-निरीक्षकों और ग्रेहाउंड कमांडो के साथ-साथ कई अन्य राज्यों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों और कमांडो को ,कोबरा, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, एनएसजी जैसे विशेष बल भी ग्रेहाउंड भाटी ने द्रोणाचार्य की भाँति प्रशिक्षित किया। और अनुशासन. उन्होंने अपने प्रशिक्षुओं को गुरिल्ला विरोधियों से लड़ने और उन पर काबू पाने के लिए सशक्त बनाया, जिसके परिणामस्वरूप तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कई अन्य राज्यों में माओवादी उग्रवाद के खतरे को निर्णायक रूप से नियंत्रित किया गया, इस प्रकार भारत में आंतरिक सुरक्षा को स्थिर करने और कई राज्यों में समृद्धि को बढ़ावा देने में मदद मिली , भाटी ने शुरुआत में एक नीम के पेड़ के नीचे 30 युवाओं को एक ट्रेनिंग देने का कार्य शुरू किया व कड़ी मेहनत , विकेट से विकट परिस्थितियों में मुकाबला करने व प्रशिक्षण के बल पर ग्रेहाउंड रीजनल ट्रेंनिंग सेंटर एक बेहतर ट्रेनिंग सेंटर के रूप में विकसित हुआ , जिसे विभिन्न राज्यों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस के हजारों युवाओं को कानून प्रशिक्षण मिला हुए व प्रवर्तन कर्मियों को चरमपंथ विरोधी प्रशिक्षण प्रदान करने में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
अन्य राज्यों में भी सेवाएं ली गई
भाटी ने संगठन और कानून व्यवस्था में सहयोग करने वाले अनुभवी प्रशिक्षक और अधिकारी तैयार करके एक लचीला और अनुकूल वातावरण तैयार किया जो पूरे देश में कहीं नहीं मिलता। ग्रेहाउंड्स की उपलब्धियों, उनके अद्वितीय कौशल, रणनीति और जवाबी रणनीतियों को मान्यता देते केंद्र सरकार ने 12 जनवरी-2000 को ओडिशा, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश जैसे नक्सल प्रभावित राज्यों में पुलिस के लिए ग्रेहाउंड्स शैली प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया। और केरल में भी श्री भाटी के मार्गदर्शन में हजारों लोगों ने प्रशिक्षण लिया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा की अमूल्य सेवाओं के लिए मिला पद्म श्री अवार्ड-
भाटी को राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उनकी अमूल्य सेवा के लिए 2011 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इससे पहले, उन्हें सराहनीय सेवा के लिए प्रतिष्ठित भारतीय पुलिस पदक और विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।
अंतिम सांस तक ट्रेनिंग सेंटर में
भाटी सचमुच कर्मयोगी थे। उनका जीवन स्मरणीय है, उनकी उपलब्धियाँ स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हैं।अपनी अंतिम सांस तक ग्रेहाउंड्स रीजनल ट्रेंनिंग सेंटर तेलंगाना में 33 वर्षों की सेवा के बाद 13 जून 2023 को 9 3 वर्ष की उम्र में उसी ग्रेहाउंड्स प्रशिक्षण केंद्र में अपनी अंतिम सांस ली व इस ट्रेनिंग सेंटर में आज शनिवार को उनकी अद्वितीय सेवाओं व समर्पण को सम्मान देते हुए उनकी प्रतिमा का लोकार्पण हुआl ऐसे उदाहरण कम ही मिलते हैं।


