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भजनलाल विश्नोई ने 100 साल पुरानी ठूंठ बनी खेजड़ी को 11 महीने तक मेहनत कर पुनर्जीवित कर मिशाल पेश की

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मधुहीर राजस्थान
जोधपुर। जुड़ गाँव के भजनलाल विश्नोई ने पर्यावरण के क्षेत्र में 100 साल पुरानी ठूंठ बनी खेजड़ी को 11 महिने तक मेहनत कर पुनर्जीवित कर मिशाल पेश की है अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 22 मई को भा.वा.अ.शि.प. शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी) जोधपुर के आईएफएस पीसीस एफ एवं निदेशक एम. आर.बालोच,डॉ संगीता सिंह, वैज्ञानिक एफ प्रभागाध्यक्ष, विस्तार प्रभाग ने विश्नोई को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अनिल कुमार, कार्यकारी निदेशक एफडीडीआई जोधपुर, सहअध्यक्ष डॉ तरुण कुमार वैज्ञानिक जी समूह समन्वयक शोध,विशिष्ट अतिथि ओमाराम चौधरी मौजूद रहे।
आफरी निदेशक ने विश्नोई को 100 साल पुरानी खेजड़ी को पुनर्जीवित करने के उपलक्ष्य व पर्यावरण के क्षेत्र मे उत्कृष्ट व सराहनीय कार्य करने पर प्रशस्ति- पत्र देकर सम्मानित किया गया जम्भेश्वर भगवान के 29 नियम में से जीव दया पालणी नियम लीलो रूंख न घावे का पालन किया। 1730 भादवा शुक्ल दशमी को खेजड़ली मे 363 लोंग खेजड़ी बचाने के लिए शहीद हो गए उनमें 8 बिश्नोई लोग जुड़ के थे, जिन्होंने अपनी जान दी। भजनलाल विश्नोई ने पूर्वजों को मंच के माध्यम से याद किया व खेजड़ी को बचाने के लिए देशी गाय की गोबर खाद,रेतीली मिट्टी मिलाकर, पीली मिट्टी,पालर पानी पिलाकर जून 2023 से मई 2024 तक मेहनत कर राज्य वृक्ष को किया हरा – भरा बना दिया।

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