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विश्व में दो पूरे परिवारों ने मातृभूमि रक्षार्थ अपने प्राणों की आहुति दी एक केसरी सिंह बारहठ का दूसरा गुरु गोविंद सिंह का है

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कैसरी सिंह बारहठ परिवार ने स्वतंत्रता संग्राम में अपनी शहादत थी इसलिए आज पूरा देश बारहठ परिवार पर गर्व कर रहा है

मधुहीर राजस्थान

सोजत (रमेश भट्ट)। स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर केसरी सिंह बारहठ के पुत्र प्रताप सिंह बारहठ सहित भाई जोरावर सिंह बारहठ व बहनोई ने स्वतंत्रता संग्राम में अपनी शहादत दी विश्व में ऐसे दो ही परिवार है जिन्होंने अपने पूरे परिवार ने मातृभूमि की रक्षार्थ कुर्बान हो गये है। सामाजिक कार्यकर्ता क्रांतिकारी कवि एवं लोक कला मर्मज्ञ देवी सिंह देवल कूपडावास ने प्रताप सिंह बारहठ की जयंती एवं शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व में पहला परिवार केसरी सिंह बारहठ का है वह दूसरा परिवार गुरु गोविंद सिंह का है इन दोनों परिवारों ने अपने पूरे परिवार की शहादत दी है बलिदान दिया है।

आज हमें इन परिवारों पर गर्व है ये परिवार हमारी राष्ट्रीय धरोहर है स्वतन्त्रता सेनानी क्रांतिकारी प्रताप सिंह बारहठ का जन्म 24 मई 1893 को उदयपुर में हुआ व 24 मई 1918 को सेंट्रल जेल बरेली में शहादत दी अंतिम सांस ली ठाकुर केसरी सिंह बारहठ शाहपुरा रियासत के जागीदार थे फिर भी उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया वह मातृभूमि के रक्षार्थ कार्य करते हुए अपनी शहादत दे दी प्रताप सिंह बारहठ को बरेली जेल में अंग्रेजों ने बहुत यातनाएं दी व कहां की तुम अपने साथियों के नाम बता दो तो प्रताप सिंह बारहठ ने एक भी अपने साथी का नाम नहीं बताया अंग्रेजों ने प्रताप सिंह बारहठ से नाम उगलवाने के लिए कई प्रलोभन दिए उनके पिता केसरी सिंह बारहठ को काले पानी की सजा हुई थी उसको माफ करने का भी प्रलोभन दिया लेकिन वह डीगे नहीं उनसे कहा गया कि तुम्हारी माता कुछ खाये पिये बिना बहुत रो रही है तो उन्होंने कहा कि वे अपनी माता को हंसाने के लिए हजारों माताओं को रुलाना नहीं चाहता हूं ।

उन्होंने अपनी 24 साल की उम्र में शहादत दे दी जोधपुर के पास आशा नाडा रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर की मिली भक्ति के कारण उन्हें पकड़वा दिया गया उन पर अंग्रेजों ने कैस चलाया एवं सेंट्रल जेल बरेली में उन्होंने अंतिम सांस ली प्रताप सिंह बारहठ का बलिदान आज भी अमर है वह हमेशा के लिए अमर रहेगा युवा क्रांतिकारी कवि एवं लोक कला मर्मज्ञ देवी सिंह देवल कूपडावास ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी एवं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को पत्र लिखकर राजस्थान स्कूल पाठ्यक्रम में बारहठ परिवार का एक पूरा पाठ रखें ताकी आने वाली पीढ़ी भी क्रांति कारी प्रताप सिंह बारहठ को याद रखें यही।

उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी चारण समाज के अलावा अनेक गणमान्य लोगों ने भी स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी प्रताप सिंह बारहठ को याद कर श्रद्धांजलि दी देवी सिंह देवल कूपडावास ने राज्य सरकार से आशानाडा रेलवे स्टेशन जोधपुर के पास भव्य स्मारक बनाने की मांग भी की है ताकि स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी प्रताप सिंह बारहठ की शहादत बलिदान को चिर स्थाई याद रखा जा सके आने वाली पीढ़ी भी उनसे प्रेरणा ले सके।

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