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कर्रा रोग में बचाव ही उपचार है डॉ. उमेश वंरगटीवार

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मधुहीर राजस्थान

जैसलमेर। जिला कलक्टर एवं संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग के निर्देशानुसार ग्राम हमीरा व रिदवा में पशुचिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपनिदेशक बहुउद्देशीय पशुचिकित्सालय जैसलमेर डॉ. उमेश वरगटिवार ने पशुपालको को कर्रा रोग के लक्षण के बारे में बताते हुए कहा कि कर्रा रोग दुधारु व स्वस्थ पशुओं में मुख्य रुप से पाया जाता है। गोवंश के आगे के पैर जकड़ जाते हैं, चलने में कठिनाई होती है, जीभ लटक जाती है। पशु दो से चार दिन में मर जाता है। बीमारी के शुरूवाती लक्षण पाये जाने पर एक्टीवेटड चारकोल लगातार तीन दिन पिलाने की सालाह दी गई। बाजरे की रोटी को तवे पर (कोयला जैसे) गरम कर, उसे कुटकर पानी में मिलाकर दिन में दो बार पिला सकते है। गोवंश को खुले में ना छोडे, दुधारू और ज्ञाभन गोवंश को नियमित रूप से मिनरल मिक्सचर खिलावे, जहां तक संभाव हो हरा चरा नियमित खिलावे। डॉ. वरगंटिवर ने कहा कि जिले में पशुओ में खुली चराई की परम्परा है यहां पशुओ को बाड़े में बांधा नहीं जाता है।

पशु फास्फोरस डिफिशिंएसी को पूरा करने के लिये गोवंश, मृत पशुओ की हड्‌डी को चबाते है, इन्ही में यह जीवाणु पाया जाता है अतः मृत पशुओं का उचित निस्तारण (गढ्ढे में गाडकर) किया जाना चाहिए। इस के लिए समस्त सरपंच एवं पंचायतीराज विभाग के माध्यम से मृत पशुओ का निस्तारण किया जाना आपेक्षित है। शिविर में पशुपालकों को व्यापार मण्डल जैसलमेर द्वारा उपलब्ध करवाई गई दवाईयों का निःशुल्क वितरण किया गया। सरपंच द्वारा व्यापार मण्डल जैसलमेर का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इस से अन्य भामाशाह भी प्रेरणा लेकर पशुधन को बचाने में सहयोग करे। शिविर में पशुओं का ईलाज जिला चल चिकित्सा इकाई के डॉ. हरीसिंह, तन्मय हर्ष, हाकमसिंह नरेन्द्रसिंह द्वारा किया गया। सरपंच का भी सहयोग प्राप्त हुआ। शिविर में 15 पशुपालकों के 45 पशुओं का उपचार का लाभान्वित किया गया।

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